Saturday, June 6, 2009

ऐसा कोई कभी दुबारा न मिल सकेगा ......


ये अन्तर जाल की दुनिया ही अजीब होती है…………एकदम परियो की कहानी जैसी। जहाँ बैठे-बैठे सारी दुनिया की सैर पर निकल जाते है !! ……और पता ही नहीं चलता .........अगर कहे की पुरे के पुरे घुमाक्कड हो जाते है तो ग़लत न होगा......!! हमारे साथ भी कभी ऐसा होगा पता न था ....पर हो ही रहा है । पता नही …..किसीने बड़ी ही प्यारी चीज बनाई ……..ऑरकुट ......जी हा ऑरकुट !!

यहाँ न जाने कितने ही लोग मिलते है......... बातें करते है ........ दोस्ती होती है...... पता नही क्या क्या होता है .......बस ऐसा ही कुछ हुआ हमारे साथ भी। नए नए ऑरकुट पर गए थे और वहां जा कर मिली एक अलग सी दुनिया जहाँ हर कोई फ्लर्ट करने की कोशिश करता ....ऐसा लगता की ऑरकुट कोई मेट्रिमोनिअल साईट हो .......!! पर मेरे साथ बिल्कुल अलग हुआ ।

आप को बताउंगी तो आप सोचेंगे के ये क्या हुआ ............इस अंतरजाल की दुनिया मे मुझे सब से खास चीज मिली जिससे मैं सदा महरूम थी ..........दिल की बात कहती हूँ मेरा कोई भाई नही था……… हमेशा मन मैं एक खलल रहता था की मेरा कोई भाई नही है । कास ! मेरा एक भाई होता जो मेरे साथ खूब खेलता, मुझे बहुत प्यार करता मुझे आइसक्रीम खिलाता................... और हम दुनिया के सब से अच्छे भाई बहन होते ये तो पक्का था .....अगर कोई मुझे बुरी नज़र से देखता तो एक खीच कर चपत लगता और सारे गंदे-गंदे लड़को की छुट्टी कर देता .........

और इस प्यारे से ऑरकुट की वजह से मुझे मेरा भाई मिल गया ........एक बहुत की प्यारा इन्सान है वो…………॥ एक दम सच्चा और अच्छा .......भाई होने की सरे गुण है उसमे। वो एक दम भाई की तरह ही गुस्सा करता है और कभी उसने आइसक्रीम तो नही खिलाई पर मांगी मैंने बहुत बार है और वो भी कहता है जरूर खिलाऊंगा…..!! पता नहीं कितनी पार्टी ड्यू है । वो मुझे इतना प्यार देता है की आइसक्रीम की मिठास कम हो जाए….. मान को बहुत ठंडक मिलती है की मेरा एक भाई है ..........बहुत प्यारा सा …… मेरा भाई ।

मैं खुश थी अब वो खालीपन भर गया जो पहले हुआ करता था …….वो भी कहता था की तुम पहली लड़की हो जिसने मुझे भाई कहा है वरना ऑरकुट पर ऐसा नही होता……..वो बहुत सुलझा सा इंसान है ……. वो कहता था मैं नहीं चाहता की तुम ऑरकुट पर रहो वेशक हम यही मिले है…… पर मेरी बहन ऑरकुट पर अच्छी नहीं लगती .....और मैंने अपना ऑरकुट अकाउंट डीलीट कर दिया ।


एक प्यारी सी भाभी भी चुन ली है उसने मेरे लिये!! और वो एक दूसरे को बहुत प्यार करते है……पर सब जानते है ……. और मैं भी जानती थी की जब मैं घर में बताउंगी तो अंज़ाम अच्छा न होगा…….मेरे और उसकी तरह वो भी ऑरकुट को उतना अच्छा नहीं मानते …।



ऑरकुट डीलीट करने के बाद हम जी मेल पर बात करते या मेसेज भेज देते थे .....एक या दो बार फ़ोन पर भी बात की ……पर हमारे घर वाले कुछ रुढीवादी है वो नही समझ सके मेरे और उसके पवित्र रिश्ते को……… और फिर क्या था हंगामा हो गया। फोन की सीम ले ली गई…..तरह तरह से समझने की कोशिश की गई……. कि दुनिया बहुत खराब होती है और लड़को की फितरत मैं नहीं समझती, उन्हे तो बस कोई मिलना चाहिए बात करने के लिये फिर वो दोस्त बन कर बात करे या बहन बन कर उनके मन में कोई फीलिंग्स नही होती …….. बगैहरा … बगैहरा ।



सारे घर में तूफान आ गया जैसे मैने कोई गुन्हा कर दिया हो……बस एक भाई ही तो पा लिया था जिसकी कमी में हमेशा महसूस करती थी ……. और मजबूर हो कर मुझे उससे बात करना बंद करना पड़ा। मम्मी ने कसम दे कर कहा की अगर तू मुझे प्यार करती है तो उस से बात करने बंद कर दे। मैं उन्हें देखती रह गई कि वो क्या कह रही है फिर क्या था माँ और भाई के बीच कसमकस शुरू हो गई और जन्म देने वाली माँ का प्यार मुझ पर हावी हो गया और मेरा भाई खो गया मुझसे…….

शायद कभी भी दुबारा बात करने का मौका न मिल सके। उसे कभी देखा नही है पर वो हमेशा मेरा भाई रहेगा । क्या हुआ अगर बात न करु…..उसे कभी न मिलु पर मन में जो भावना उस के लिये है वो कभी नही बदल सकती। वो मेरा भाई है और हमेशा रहेगा । चाहे फिर मेरा भाई भले ही ये कह की मैने उसे धोखा दिया है…….. धोखा तो दिया है पर भाई में तेरे बहन हूँ और जब मन से महसूस करोगे तो मेरे मजबूरी भी समझ जैओगे। और एक बात जो मैं अपने भाई से न कह सकी…… आप हमेशा मेरे प्यारे अच्छे वाले भाई रहोगे ……चाहे में बात न करु ……..और में ये जानती हूँ जब मेरा भाई जनेगा तो मुझे माफ नही करेगा इस गलती के लिये …… और करे भी क्यो …….?? उसे अपनी बहन बहुत प्यारी है सब से जयादा और वो ही ऐसे चली गई बिना कुछ कहे…. हां
बिना कुछ कहे तो फिर कैसे माफ़ करेगा ……..

बस अब इतना समझ आता है।
कि ऐसा भाई कभी दुबारा न मिल सकेगा।।


जो खलल मेरे मन में बचपन से है।
वो बुढापे तक साथ न छोडेगा।।


मिल तो जायेगा हमे सब कुछ।
बस तेरे जैसा कोई दूसरा न मिलेगा।।


सब से होंगे झगडे हमारे।
बस एक तू ही हमसे न लडेगा।।


रिश्ते तो बहुत है इस दुनिया में निभाने को।
बस तुमसे ही हमारे कोई रिश्ता न रहेगा।।


चाहत तो बहुत है की तुझ को माना लूं।
पर माँ का कर्ज है वो कैसे चुकेगा।।


लोगो से भारी होगी ये मेरी ज़िन्दगी।
बस एक तू ही मुझ से रूठा हुआ हमेशा दूर रहेगा।।


चाहे कहे कुछ भी कोई ग़म न करूँगी।
तू ता-उम्र बस मेरा भाई ही रहेगा।।

84 comments:

Einstein June 6, 2009 at 5:44 PM  

Mai apki Bahavanaon ki kadra karta hoon...Hote hai aise Bhai aur Hote hai aise Rishte..Lekin Maa Maa hoti hai..Mai apna Muhar lagata hoon aap Bhai-Bahan ke Rishton pe....Kunwar...

अक्षय-मन June 8, 2009 at 7:19 PM  

बहुत ही अटूट रिश्ता है...मगर अब हालातों के आगे मजबूर है......मगर रिश्ता तो है और रिश्ते कभी नहीं मरते....
घर मैं आपको बहुत प्यार करते आपकी बहुत चिंता करते हैं.....तभी उन्होंने ऐसा कदम उठाया........
क्यूंकि वो उस व्यक्ति आपके भाई से अनजान हैं./....
जब आप खुद इस काबिल हो जाओगे तो आपको कोई नहीं रोकेगा न ये समाज न कोई बंधन...
फिर आप भाई से मिल सकते हो....
बात कर सकते हो.....
घर वालों की चिंता अभी जायज़ है.....
लेकिन आप का ये रिश्ता देख कर मन भर आया..
और क्या कहूं......
आपको हर वो रिश्ता हर वो प्यार मिले जीवन की सारी खुशियाँ मिले.....बस यही कामना करता हूं....

अक्षय-मन

raj June 8, 2009 at 7:48 PM  

i wihs n pray ki aapka rishta kabhi na tute.....nibhane ki achha honi chihye...duniya me kya nahi hota.....apki post boht hi achhi lagee jitna kahun utna kum hai....coz i strongly believe in relations...

hempandey June 8, 2009 at 8:55 PM  

अंतरजाल की मित्रता और रिश्ते अंतरजाल तक ही सीमित रहें तो अच्छा है.

abhilash June 8, 2009 at 9:00 PM  

Hum aap ke baton se bahut khush hai. thank you... magar ye mai kis ko lik raha hoon woh is kavita ka ek pad ki arth bi nahi jaanta. parantu oh nahi sunna chahti hai. chodke chaligayi hume andhera mein. usi andhera mein hum kavitha ko hmari bhavano se roshan karna chahte hai.

Aap ki jo blog hai woh bahut accha hai.... shayad aap jo bhi likte hai dil se likte hai.

shivansh sharma June 9, 2009 at 10:31 AM  

मैंने पढ़ी, आपकी " मेरा भाई"
आपकी रचनाओं में विरोध का एक बहुत ही शांत और परिशुद्ध रूप लक्षित होता है
हार्दिक शुभकामनाएं

मीत June 9, 2009 at 12:15 PM  

आपका भाई आपकी मज़बूरी जरुर समझेगा...
आपकी इस पोस्ट से ऑंखें नम हो गयीं... लेकिन आपको अपने भाई से रिश्ता नहीं तोड़ना चाहिए था... अगर मेरे साथ ऐसा होता तो में अपनी बहन के लिए साडी दुनिया से लड़ जाता....
क्योंकि मेरी नजर में भाई-बहन से बढ़कर कोई रिश्ता नहीं...
इस दुनिया में हर कोई बदल सकता है.... लेकिन एक भाई-एक बहन से या फिर एक बहन-एक भाई से कभी नहीं बदल सकते...
जब आपको उसपे भरोसा है तो ऐसा नहीं होना चाहिए था....
उम्मीद करूँगा की एक बहन को उसका भाई फिर से मिल जाये...
मीत

dilip June 9, 2009 at 12:34 PM  

aapka bhai aapko hamesha bahan manega ye to pakka he bus use visvas dilaye rakhna ki aap hamesha saye ki tarah unke sath ho bas dono bhai bahan ka pyar bana rahe yahi kamna ishwar se karta hu.... Dilip yadav

प्रकाश गोविन्द June 9, 2009 at 12:40 PM  

बेहद आश्चर्यजनक
अविश्वसनीय

आप रहती हैं देश की राजधानी दिल्ली में !
आप बैंक में एक्जीक्यूटिव की नौकरी करती हैं !
लेकिन बातें सब ऐसी हैं जैसे दूर दराज के किसी गाँव-देहात की लडकी बात कह रही हो !

हैरत है कि आपकी मां ने आपको घर से बाहर निकल कर पढने ही क्यों दिया ?
ऊपर से सयानी लडकी को नौकरी भी करने दी ? तौबा ,,, तौबा !!
घर में कम्प्युटर भी आया और उस पर से सारी बुराई की जड़ इंटरनेट का कनेक्शन भी ले लिया ... है न कमाल की बात ? मुझे यकीन है कि केबल कनेक्शन तो आपके यहाँ हरगिज नहीं होगा !

अरे गार्गी जी मैं आपकी भावनाओं की अत्यंत इज्जत करता हूँ ! आपके मनोभाव सुनकर भावुक भी हो गया था ! लेकिन अगर आपको घर वालों ने रोका तो मुझे लगता है वो सही हैं, क्योंकि आपके अन्दर अभी समझदारी पूर्णतयः विकसित नहीं हुयी है !

में आपकी भावनाओं को आहत नहीं करते हुए सिर्फ इतना पूछना चाहूँगा की आपने पहले से अपने घर वालों को अपने भाई के बारे में क्यों नहीं बताया ? क्यों नहीं रक्षा बंधन के दिन घर पर बुलाया (पोस्ट द्बारा भी राखी धर्म का पालन हो सकता है) !

मैं यह नहीं कहता कि आपके इस रिश्ते में कोई खराबी थी लेकिन यह इंटरनेट की दुनिया है ..... यहाँ अधिकतर सारे रिश्ते हवा-हवाई होते हैं ! मैंने न जाने कितने लोगों को देखा है कि वो चैटिंग की शुरुआत ही दीदी, सिस्टर या बहन कहकर करते हैं ! भावुक लड़कियां बह जाती हैं बातों में ! हकीकत तब सामने आती है जब मुलाक़ात होती है ! यह सब मैं अपने मन से या पत्रिकाएं पढ़कर नहीं कह रहा हूँ !

ज्यादा बात को न घसीटते हुए बस इतना ही कहना चाहूँगा कि अगर आपको लगता है कि आपका रिश्ता पवित्र है .... भावनाएं सच्ची हैं तो आप दोनों बहन-भाई को कोई भी जुदा नहीं कर सकता ! देर-सवेर यह रिश्ता पुनः जीवंत हो जाएगा !

मेरी शुभकामनाएं !

alfaz June 9, 2009 at 3:46 PM  

आप की आप बीती पड़ कर एक ग़ज़ल याद आती है,
हाथ छुते भी तो रिश्ते नहीं टुटा करते ,
वक़्त की शाख से लम्हे नहीं तोडा करते.
You believe india is a poor country.
I believe india is a rich country,
with poor mentality.
Reality is always different from illusion.
हम न समझे थे बात इतनी सी ख्वाब शीशे के ये दुनिया पत्थर की........

Udan Tashtari June 10, 2009 at 4:13 AM  

आभासी दुनिया है-घर वालों का अनुभव उन्हें डराता है जो कि अपनी जगह बिल्कुल सही है-और तो क्या कहा जाये. आप खुद समझदार हैं, फिर भी संभल कर चलने में तो कोई बुराई नहीं.

gagan June 10, 2009 at 9:45 AM  

गार्गी जी !
यह कहना चाहूँगा की , ऑरकुट कोई बुरी जगह नहीं है , इवन मी एंड माय सिस्टर वी बोथ हव ऑरकुट अकाउंट .


विचार करें :-
१. अब सबसे पहले आपके " भाई " ने आपसे ऑरकुट से हट जाने के लिए क्यूँ कहा .
२. आपके ऑरकुट से हट जाने के बाद आप में से किसने पहले यह कहा की हम , अब जी मेल पर messaging करके बात करेंगे .
३. आपके घर वालों को ऐसा क्या शक हुआ के आपसे सिम ही ले ली गयी , जबकि आपको इतनी सुविधाएँ आपके माता पिता ने दी हैं .
४. क्या आपका भाई आपको समय आसमय काल करता था .
५. कोन कॉल पहले करता था .
६. क्या बातें बड़ी ही रूमानी होती थी .

उपरोक्त बातें आपको अतिशयोक्ति लग सकती हैं ,
किन्तु मेरा आपको १ मशविरा है के अज्नावियों के सामने , अपने विचार पहले न रखें , खासकर जब जब आप उसके विचार व्यवहार का आंकलन करने में , असमर्थ हों .
गोविन्द जी से में कुछ कुछ सहमत हूँ , बड़ी ही हिम्मत करके आपसे सच बोला है , मैंने

अगर "मेरा भाई" रचना थी तो , बढियाँ लिखा है आपने .
शुभकामनाये .

manish June 10, 2009 at 9:51 AM  

आप के मन की व्यथा को मै समझ सकता हु .......
आप ने एक भाई के लिए जो विरह वेदना को शब्दों मे बाँधा है उस का जबाब नहीं ,
आप ने इस विरह वेदना को अति सुंदर तरीके से शब्दों मे बाँधा है जिसके लिए आप बधाई के पात्र है ......
"
रिश्ते तो बहुत है इस दुनिया में निभाने को।
बस तुमसे ही हमारे कोई रिश्ता न रहेगा।।
चाहत तो बहुत है की तुझ को माना लूं।
पर माँ का कर्ज है वो कैसे चुकेगा।।
लोगो से भारी होगी ये मेरी ज़िन्दगी।
बस एक तू ही मुझ से रूठा हुआ हमेशा दूर रहेगा।।
चाहे कहे कुछ भी कोई ग़म न करूँगी।
तू ता-उम्र बस मेरा भाई ही रहेगा।। "

अति सुंदर जी ,
आशा है आप आगे भी इसी तरह की सुंदर रचनायों का रसस्वादन कराती रहेगी .....
हार्दिक अभिनन्दन वा हार्दिक शुभकामनाये .......

निर्झर'नीर June 10, 2009 at 4:25 PM  

mai prakash ji or gagan ji ki baat se kam-o-besh sahmayt hun ..
likhne ko to bahut kuch hai par likhna uchit nahi.

upar sab kuch padhne ke baad ek baat to tay hai ki aap bahut bhavuk or bholi hai..

aaj ke daur mein har kisi pe visvas karna moorkhta hai lekin kisi par bhi
visvas na kar pana usse bhi badii bevakoopii.

Akhil June 10, 2009 at 7:04 PM  

गार्गी जी,
आपका पूरा वाकया पढ़ा और उसको पढ़ कर साफतौर पर लगता है कि आप और आप का मन गंगा जल कि तरह पवित्र है. आपके तथाकथित भाई कि विचार जानने का चूँकि मौका नहीं मिल पाया इसलिए उस पर भी कोई आक्षेप लगाना अनुचित होगा किन्तु इतना अवश्य कहूँगा कि यदि कोई व्यक्ति आपका भाई बन सकता है तो वह आपके माता पिता का बेटा भी तो बन सकता है. उसने आपके माता पिता से मिलकर इस रिश्ते पर विश्वास कि मोहर क्यूँ नहीं लगाई. अगर उसके मन में कोई पाप नहीं था तो उसने आपके पूरे परिवार से रिश्ता क्यूँ नहीं जोड़ा. ज़रा सोचिये...

VIJAY TIWARI " KISLAY " June 10, 2009 at 7:52 PM  

काफी हद तक आप की बातें विचारणीय हैं,
आपकी अभिव्यक्ति का तरीका अच्छा लगा .
- विजय

Alka Ray June 10, 2009 at 8:27 PM  

hamko lagta hai govind sir ki baat bilkul sahi hai.

अनिल कान्त : June 11, 2009 at 6:05 PM  

achchhae aur bure log har jagah hain...internet ki duniyaa jyada mayawi hai .... lekin haalat kis se kab kya kara dein kuchh kaha nahi ja sakta ...


baaki gaar rishta pavitra hai to ...ho sakta hi aage jakar mil jaye

Rohit "meet" June 11, 2009 at 7:50 PM  

aapki rachnaye bahut kuchh sochne pe majboor kar deti hai .....jane kyo pad kar aankh bhar aayi ?

Science Bloggers Association June 12, 2009 at 11:00 AM  

हतप्रभ कर देने वाली घटना है। आश्‍चर्य है कि ऐसा सब कुछ दिल्‍ली में हा रहा है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

satish kundan June 13, 2009 at 10:00 AM  

गार्गी जी सबसे पहले आपका शुक्रिया की आप मेरे ब्लॉग पे आई और इतना बढ़िया कमेन्ट किया...आपकी रचना पढ़ी..जब मैं पढ़ रहा था तो जैसे लग रहा था की मैंने जो जो पोस्ट डाली है अपने ब्लॉग पे ''एक लड़की का प्रश्न मम्मी से'' वो एकदम से आपही का प्रश्न हो कितनी अजीब बात है की आप जैसा ही अनुभव मेरी एक दोस्त का भी रहा है...और हाँ आप मेरे ब्लॉग पे हमेशा आतें रहेंगी ऐसी आशा है!!!!!!!!!

ओम आर्य June 15, 2009 at 11:59 AM  

rishta hi duniya ka atut bandhan hai .......hone ko kuchh bhi hota hai....aankh kholakar dekhane par sab dikhata hai..

sarwat m June 16, 2009 at 11:21 AM  

देश की राजधानी दिल्ली में घटी इस लोमहर्षक घटना के बारे में पढ़कर विस्मित हूँ. क्या आप, एक पढी लिखी, नौकरी पेशा, कंप्यूटर में पारंगत, युवा अपने मम्मी से आमने सामने की बात नहीं कर सकती थीं. अपने मन की पवित्रता, उस रिश्ते का पक्ष तो रखना चाहिए था. मुझे पता है आपने ऐसा सारा कुछ करने की कोशिश जरूर की होगी. लेकिन हाय रे इगो ! एक दूसरा पहलू भी है, आपकी उम्र ने अभी आप को वो अनुभव नहीं बख्शे हैं जिनकी बदौलत आप किसी इन्सान के अंदर छुपे हुए फरिश्ते या शैतान की पहचान कर सकें. यार, एक अदद भाई ही चाहिए न! अगर कोई नहीं है तो मैं हूँ ना! आप मेरी बिटिया से २-३ साल बड़ी और बेटे से २-३ साल छोटी हो. मम्मी पापा वगैरह को बता देना कि एक भाई मिल गया है. अगर कभी देर सवेर दिल्ली आना हुआ तो आइसक्रीम भी खिला दूंगा.
लेकिन अगर यह सिर्फ एक कविता और उसकी पृष्ठभूमि है तो ....अच्छी है. भाई तो मैं फिर भी हूँ और रहूँगा.

कार्टूनिस्ट अजय सक्सेना June 16, 2009 at 5:14 PM  

गार्गी जी ! आपकी प्रस्तुति ..अतुलनीय है ...इन हालत पर एक शेर याद आ रहा है -
''दिल में न हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
क्योंकि खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती ..
इस शहर में हर शख्स हमसे खफा है
क्या करे हर एक से अपनी तबियत भी नहीं मिलती..''
अपने उस से भाई अपने ब्लॉग के माध्यम से तो जुड़ ही सकती है ..

shama June 16, 2009 at 10:49 PM  

Gaargee, bohot sundar likha hai..!

महामंत्री - तस्लीम June 23, 2009 at 12:22 PM  

भाई बहन का सम्‍बंध चिरस्‍थायी हो, यही कामना है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Paiker June 23, 2009 at 5:14 PM  

I can understand ur feelings , hota hai aisa bhi .yahi life hai ...

u should drop him a mail telling the details so that he will know the truth..

Gaurav June 27, 2009 at 1:09 PM  

hi..gargi. reading ur blog seems i m fallin in love with you..bt dont worry i hv a gf...ab ise pyar ki gali hi to kahenge na...

योगेन्द्र मौदगिल June 27, 2009 at 1:46 PM  

दुनिया जैसी दिखती है वैसी हो भी सकती है और नहीं भी.........

jamos jhalla July 5, 2009 at 12:39 PM  

hue mehnge bahut chiraag huzoor chotaa chithaa likha karo.
angrezi-vichar.blogspot.com
jhallevichar.blogspot.com

भूतनाथ July 10, 2009 at 11:39 PM  

ये दुनिया है....ऐसी ही है.....और शायद ऐसी ही रहे भी....यहाँ अपनत्व फिजूल है....और रिश्ते स्वार्थी....नाते बकवास...ये दुनिया है....ऐसी ही है...और शायद ऐसी ही रहे....दरअसल ये खुद चैन से जी नहीं पाती....और शायद इसीलिए किसी को भी चैन से जीने भी नहीं देती....!!कहा ना,ये दुनिया है....ऐसी ही है.....और शायद ऐसी ही रहे भी....!!!!

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) July 12, 2009 at 4:55 PM  

shabd nahi sujh rahe bus yek tees mahsus kar raha hun
saadar
praveen pathik
9971969084

'अदा' July 14, 2009 at 6:51 AM  

गार्गी जी,
अच्छा हुआ आपने अपने मनोभावों को हमारे साथ बाँटा, अंतरजाल की पहुँच जीवन में बहुत गहरे तक चली गयी है, शुक्र है आपको एक 'भाई' मिला था, और आप को ख़ुशी हुई, लेकिन आप यह न भूलें की आपके अपने आपका हमेशा कल्याण ही चाहेंगे, वो जो भी निर्णय लेते हैं, वो उनके अनुभव, और उनकी समझदारी पर निर्भर होती है, हम बच्चे चाहे अपने माँ-बाप से ज्यादा पढ़ लिख जाएँ लेकिन दुनिअदारी, और अनुभव में हमलोग आम तौर पर उनसे बहुत पीछे रहते हैं, आप खुशकिस्मत हैं की आपको आपके अपनों ने सम्हाला हुआ है, 'भाई' आप एक ढूंढो तो एक हज़ार मिल जायेंगे लेकिन माँ आपके पास सिर्फ एक है और उन्हें सहेज कर रखें, इस दुनिया माँ-बाप आपकी पूँजी हैं, इस पूँजी को किसी 'मुह्बोले' भाई के लिए खोना सबसे बड़ी मूर्खता है और कुछ नहीं......
उम्मीद है अब तक आपके सर से उस 'भाई' का भूत उतर चूका होगा...

AAWAZ July 29, 2009 at 2:19 PM  

gargi,
" mai aur meri eksacchai ki puri team bhagawan se duva karenge ki tumhe tumhara orkut wala bhai mil jaye .muje pata hai ki apno ke khone ka dard kya hota hai sister waqt per bharosa rakho vo milega fir se ek baar magar scch kahu sister tumne wakai me apne dil se likha hai dil ki gahrai me chupa dard saaf dikhai de raha hai..BHAGAWAN KARE IS RAKHI KE DIN TUMHE TUMHARA BHAI MIL JAYE "

http://eksacchai.blogspot.com

शरद कोकास August 7, 2009 at 2:15 AM  

गार्गी कुछ ऐसा हुआ कि दो माह बाद आज तुम्हारी यह पोस्ट देख पाया मुझे यकीन है कि ऐसा सचमुच मे घटित हुआ है क्योंकि 20 साल पहले ऐसी ही घटना मेरे साथ घटित हो चुकी है रेडियो सीलोन कर्यक्रम हफ्ते के श्रोता मे एक बहन मिली और डाक से राखी वगैरह भेजने के बाद गुम हो गई .आज तुम्हारा यह अनुभव पढकर उसकी बडी याद आई उसे भी मैने कभी नही देखा था खैर तुमने इसे यहाँ लिख दिया अच्छा किया . तुम बडी होकर ज़रूर अच्छी लेखिका बनोगी क्योंकि जीवनानुभव को रचनानुभव मे परिवर्तित करने की क्षमता तुम मे है .सिर्फ भाषा और शिल्प के लिये मेहनत करना होगा यहाँ की तारीफ पढकर भ्रमित नही होना साहित्य की दुनिया बहुत क्रूर है .अच्छी लेखिका बनना है? तो उसके लिये साहित्यिक पत्रिकाये नया ग्यानोदय,कथन,पूर्वग्रह, कथादेश,वसुधा,वागर्थ,पाखी आदि पढो.(और मेरे ब्लॉग भी पढो )

कुमार आशीष August 17, 2009 at 11:00 PM  

आदमी और आदमी के बीच बड़ी दूरियां हैं गार्गी जी.. जिसे नापने में अक्‍सर भावुकता के पांव के छाले फूट जाते हैं। ..खैर जो भी होता है अच्‍छा ही होता है..यह मान कर चलिए और मगन रहिए। शेष फिर किसी मौके पर..

Dipak 'Mashal',  August 22, 2009 at 3:00 PM  

pata nahin kaun sahi hai aur kaun galat, kyonki dunis me utne tsrsh ke hi log hain jitne kul log hain. yani har koi ek alag aur apne tarah ka insaan hai. ye bhi sach hai ki har insan me ek shaitan aur ek devta nivas karta hai, lekin ye baat bhi galat nahin ki orkut ya gmail pe banne wale jyadatar log sirf ek rishta kayam karna chahte hain fir chahe wo jo bhi ho aur uske baad us rishte ko jaise pani aur khad se seencha jaye wo usi me tabdeel ho jata hai. Kabir das ji ne kaha bhi hai ki - 'chandan vish vyapat nahin, lipte rahat bhujang.'
lekin aankh band karke kisi pe bharosa karne ka ye waqt to nahin hai. ye bhi swabhawik hai ki male aur female me ek attraction hota hai, jo shayad ladkon me kuchh jyada hi hota hai. vaise meri sagi bahin ka naam bhi Gargi hi hai, ek hi chhoti sagi bahin hai aur main bhi uska iklauta bhai. fir bhi kuchh rishte shayad sage(khoon ke rishte) ya kahen ki bhagwan ke rishton se bhi bade hote hain, kyonki unhe aap khud ijaad karte hain aur aapme unhe nibhane ki himmat bhi honi chahiye, meri bhi 3 rakhi ya kahen ki khud ki banai bahinen hai(dekhne wali baat ye hai ki teenon different culture ki hain malyali, marathi aur UP se)aur we kisi tarah Gargi(ghar ka naam Rani) se kam nahin hain lekin haan maine unhe orkut pe nahin dhoonda. hum log mile kai mahine sath me kaam kiya ek doosre ko jana apne sukh dukh bante aur ek doosre ko laga ki uske man me bhai jaisi feeling hai mere liye ya mere man me uske liye bahin jaisi tabhi rishte ne janm liya. warna dosti ka rishta bhi kam paak nahin hota.

Ashwani Singh August 22, 2009 at 7:41 PM  

I wish ki i will get an immediately response after entering my comment i know n understand all problem but u have to tell all the things to your brother. Ur brother definitely missing u every time. If you can go and put a scrap to your brother. He may sends you a friend request on orkut. He loves u alot. Vo dil se behan manta hai ek baar uske dil ko dekh ke dekho.

monali September 23, 2009 at 2:36 PM  

Hota h Gargi ji...aisa bhi hota hai...seekh lijiye ki ye dunia ladkiyo k liye aise hi kaam karti h...jab hamare maa,papa hi hum par bharosa karne kko taiyaar nahi hai to koi aur kyu karega aur ye shak ek din hamara bharosa bhi hum se utha dega... lkn aap udas mat ho rishte duri samajhte hain...paas hona nahi sath hona zaruri h...

viruslover November 14, 2009 at 3:53 PM  

ये अन्तर जाल की दुनिया ही अजीब होती है…………एकदम परियो की कहानी जैसी। जहाँ बैठे-बैठे सारी दुनिया की सैर पर निकल जाते है !! ……और पता ही नहीं चलता ki kab koi flirts aakar bhai pita maan bahan ban jata hain.aur pahle to mansik fir saririk soshan karta maine bahut se logo ko dekha hai misscall,lettar baji , local train main traval karte hue log pavitra riston ka sahara lete hain aur fir kisi din mouke ka fayda uthate hain
lekin aapki rachna main marmik ahsas tha dil aankhe dimag sab rone laga realy

blossoming rose lockus December 8, 2009 at 4:28 PM  

gargi ji bhi aur bahn ki ye pavan rachna vastav me sarahniya hai,kahte hai pavitra riste me badi sakti hoti haagar aap ka rista wastav me saccha hai to ek na ek din aap ka bhai aap ke paas wapas jaroor laot aatye ga

Ashwani Kumar Singh September 13, 2012 at 1:53 AM  
This comment has been removed by the author.
Anonymous,  November 14, 2012 at 3:45 PM  

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